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14 अगस्त 1947 की रात को आजादी नहीं आयी बल्कि ट्रासफर आफ पावर का एग्रीमेंट हुआ था।

October 31, 2015

जवाहर.IMG_20150628_224729आदरणीय दोस्तो,

Transfer of power Agreement यानी भारत की आजादी की संधि। ये इतनी खतरनाक संधि है कि अगर आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर सन 1857 तक किये गये सभी 565 संधियों या कहें साजिस को जोड़ देंगें तो उससे भी ज्यादा खतरनाक संधि है यह।

14/15 अगस्त1947 की दरमियानी रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आयी बल्कि ट्रांसफर आफ पावर का एग्रीमेंट हुआ था, पंडित नेहरू और लार्ड माउण्ट बेटन के बीच में। Transfer of power और Independence ये दो अलग चीजें हैं।

सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है?

आप देखते होंगे कि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाय, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमंत्री जब शपथ ग्रहण करता है तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर में हस्ताक्षर करता है, उस रजिस्टर को ट्रांसफर आफ पावर की बुक कहते हैं और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमंत्री नये प्रधानमंत्री को सत्ता सौंप देता है। और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है।

यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे। लार्ड माउबेटन बेटन ने अपनी सत्ता पंडिर नेहरू के हाथ में सौंपी थी। और हमसे कह दिया कि स्वराज आ गया। कैसा स्वराज? और काहे का स्वराज? अंग्रेजों के लिये स्वराज का मतलब क्या था? और हमारे लिये स्वराज का मतलब क्या था?

ये भी समझ लीजिये. . . .

जवाहर.धुम्रपान.4 जवाहर.2

अंग्रेज कहते थे कि हमने स्वराज दिया। माने अंग्रेज ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरूरत पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे। यह अंग्रेजों की व्याख्या थी। और हिंदुस्तानी की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया।

और इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गये। भारत और पाकिस्तान दो Dominion States बनाए गये हैं। Dominion State का हिंदी में अर्थ होता है, एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य। ये शाब्दिक अर्थ है, और भारत के संदर्भ में इसका असली अर्थ भी यही है। अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है “One of the self governing nations in the British Commonwealth” और दूसरा “Dominance of power through legal authority”।

,Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है। मतलब सीधा है कि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/ मातहत ही हैं। दुख तो ये होता है कि उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे इस संधि को मान लिया या कहें जानबूझ कर यह सब स्वीकार कर लिया। और ये जो तथा कथित आजादी आयी, इसका कनून अंग्रेजों की संसद में बनाया गया, और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act यानी भारत के स्वतंत्रता का कानून। और ऐसे धोकाधड़ी से अगर भारत की आजादी आई हो तो वह आजादी, आजादी है कहां? और इसीलिये गांधी जी १४अगस्त१९४७ की रात को दिल्ली में नहीं आये थे। वो नोआखाली में थे। कांग्रेस के बड़े नेता के बुलाने जाने पर भी गांधी जी ने मना कर दिया था। क्यों?  गांधी जी कहते थे कि मैं मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है। और गांधी जी ने स्पष्ट कर दिया था कि ये आजादी नहीं आ रही है, सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है। और गांधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की थी।

  1. उस प्रेस स्टेटमेण्ट के पहले ही वाक्य में गांधी जी ने यह कहा कि मैं हिंदुस्तान के उन करोड़ों लोगों को यह संदेश देना चाहता हूं कि यह जो तथा कथित आजादी (so called freedom) आ रही है,ये मैं नहीं लाया। ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंसकर लाए हैं। मैं मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है। और १४अगस्त१९४७ की रात को गांधी जी दिल्ली में नहीं थे। माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिंदुस्तान की आजादी की नींव रखी हो, वो आदमी १४अगस्त१९४७ की रात दिल्ली में मौजूद नहीं था। क्यों? इसका अर्थ है कि गांधी जी इससे सहमत नहीं थे। (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था।)  और १४अगस्त१९५७ की रात आजादी नहीं आयी Transfer of power का Agreement हुआ था, पंडित नेहरू और अंग्रेजी सरकार के बीच में।
  2. अब शर्तों की बात करते है–इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं। वो एक शब्द आप सुनते हैं न Commonwealth Nations, इसका मतलब होता है समान सम्पत्ति। किसकी समान सम्पत्ति? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पत्ति। आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी हैं। और वो आज भी भारत की नागरिक हैं, और हमारे जैसे और भी ७१ देशों की महारानी हैं वो। कामनवेल्थ में ७१ देश हैं औए इन सभी ७१ देशों में जाने के लिये ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि वो अपने ही देश में जा रही हैं, लेकिन भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ब्रिटेन में जाने के लिये वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दूसरे देश में जा रहे हैं।
  3. मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक हैं या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का एक उपनिवेश है इसलिये ब्रिटेन की महारानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती। अगर दौनों बातें सही है तो १५अगस्त१९४७ को हमारी आजादी की बात कही जाती है वह झूठ है। और Commonwealth Nations में हमारी जो एंट्री है वो एक Dominion State के रूप में है न कि Independent Nation के रूप में। इस देश में प्रोटोकाल है कि जब भी नये राष्ट्रपति बनेंगे तो २१ तोपों की सलामी दी जायेगी उसके अलावा किसी को भी नहीं। लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती हैं तो उनको भी २१ तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी आयीं थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम छपा था वह ब्रिटेन की महारानी का था और उसके निचे भारत के राष्ट्रपति का नाम था। मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है। ये है राजनैतिक गुलामी हम कैसे माने कि हम एक स्वतन्त्र देश में रह रहे है। एक शब्द आप सुनते होंगे—High Commission! ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दूसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता। एक और मानसिक गुलामी का उदाहरण भी देखिये—हमारे यहां के अखबारों में आप देखते होंगे कि कैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं —(ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिजाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स नहीं) प्रिंस चार्ल्स,  और अब तो एक और प्रिंस विलियम भी आ गये हैं।


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