Skip to content

साधु-संगत!!!

जनवरी 9, 2017

wpid-img-20141217-wa0003.jpg.

वहां प्रभु की अनुकंपा की बात होती है। वहां तुम्हारे दुख, तुम्हारे अंधेरे, तुम्हारे अज्ञान की बात होती है। वहां तुम्हारे आंसू जगाए जाते हैं, खो गये आंसू-पुन: पुकारे जाते हैं। और साथ ही परमात्मा की अनुकंपा की बात की बात होती होती है। क्योंकि वहां तुम्हें खबर मिलती है कि तुम्हारा पाप कितना भी बड़ा क्यों न हो, मगर उसकी करुणा उससे बड़ी है। पुकारो भर। तुम इतनी दूर नहीं जा सकते कि वह तुम्हें उठा न ले। भगवान के हजार हाथ हैं, वह सब तरफ से उठा लेगा, लेकिन कब तक जब तक तुम पुकारो ना।

साधु-संगत में जीवन का दुख दिखाई पड़ता है। दुख ही दुख है यहां। यहां सुख कब किसने जाना! कभी यदि सुखी आदमी मिल जाए तो तत्क्षण पाओगे: वह यहां का नहीं है। वह वहाँ का है, यहां परदेश में है। यहां अजनबियों के बीच है।

है रहीमो करीम अपना ख़ुदा

हमसे लुत्फो करम की बात करो।

तो वहां पाप की बात होती है: परमात्मा की करुणा की बात होती है। वहां हमारे दुख-पीड़ा की बात होती है।

हिज्र भी है वसाल का पैगाम

ऐसे राहत सितम की बात करो।

वहां विरह की बात होती है और विरह के साथ ही साथ यह भी बात होती है कि विरह उससे मिलन की सूचना है; उससे मिलन की तैयारी है। हमने उसे खोया है पाने को। यह विरह भी उसके मिलन को प्रीतिकर बनाने वाला है।

हिज्र भी है वसाल का पैगाम

इसमें संदेश छिपा है मिलन का।

जो क़दम हैं बनाते ख़ुद मंज़िल

इश्क़ के उस क़दम की बात करो।

जो क़दम बनाते ख़ुद मंज़िल, …जो कदम अपने आप में अपनी मंज़िल लिये हुए है, उस प्रेम के कदम की बात वहां होती है।

साधु-संगत यानी प्रेम की चर्चा।

———————-

Advertisements

From → Uncategorized

टिप्पणी करे

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: